बाबा बैद्यनाथ धाम: कामना लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम!

बाबा बैद्यनाथ धाम: कामना लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम!

क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और 51 शक्तिपीठों में से एक, दोनों एक साथ विराजमान हैं?

हम बात कर रहे हैं झारखंड के देवघर में स्थित श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की, जिसे भक्तजन प्यार से बाबा बैद्यनाथ धाम या बाबा धाम भी कहते हैं। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कारों का एक अनूठा केंद्र है, जहाँ हर मनोकामना पूरी होती है!

बाबा बैद्यनाथ धाम

क्यों है बाबा बैद्यनाथ धाम इतना खास?

यह धाम हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। इसकी महत्ता को तीन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:

1. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक (Jyotirlinga)

बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में नौवां है। यह वह स्थान है जहाँ महादेव स्वयं ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे।

2. कामना लिंग (Kamana Linga) का रहस्य

इस शिवलिंग को ‘कामना लिंग’ के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मुरादें लेकर आता है, बाबा भोलेनाथ उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं। यह नाम रावण से जुड़ी पौराणिक कथा से आया है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है।

देवघर में शिवमहापुराण कथा: जय बाबा वैद्यनाथ धाम

देवघर में शिवमहापुराण कथा: जब बाबा वैद्यनाथ धाम

3. 51 शक्तिपीठों में से एक (Shaktipeeth)

यह एकमात्र ऐसा धाम है जहाँ शिव और शक्ति (सती) दोनों का आशीर्वाद एक साथ मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव देवी सती के मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब इसी स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। इसीलिए इसे ‘हार्दपीठ’ या ‘सिद्ध पीठ’ भी कहा जाता है।

 

पौराणिक कथा: कामना लिंग की स्थापना

कामना लिंग की स्थापना के पीछे लंकापति रावण की एक रोचक कथा है:

  • वरदान की इच्छा: रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और अपने सिर तक अर्पित कर दिए।
  • रावण की भूल: शिवजी ने प्रसन्न होकर रावण को वरदान दिया कि वह इस शिवलिंग को लंका ले जा सकता है, पर शर्त यह थी कि वह इसे रास्ते में कहीं भी ज़मीन पर नहीं रखेगा।
  • विष्णु का हस्तक्षेप: देवताओं के आग्रह पर, भगवान विष्णु ने एक बालक (या ग्वाले) का रूप धारण किया और रावण को भ्रमित कर शिवलिंग को धरती पर रखवा दिया।
  • स्थापना: रावण ने पूरी शक्ति लगाकर भी शिवलिंग को नहीं उठा पाया। निराश होकर, उसने उस लिंग पर अपना अँगूठा गड़ा दिया। तभी से, यह कामना लिंग इसी स्थान पर स्थापित है, और इसे ‘रावणेश्वर कानन’ भी कहते हैं।

एक अन्य मान्यता: भगवान शिव ने एक ऋषि बैद्यनाथ के रोग का निवारण किया था, इसलिए उन्हें ‘वैद्यनाथ’ (चिकित्सकों का भगवान) कहा गया।

बाबा धाम का विशेष महत्व

अखंड सौभाग्य का वरदान: गठबंधन अनुष्ठान

यह मंदिर विशेष रूप से शादीशुदा जोड़ों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि यहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए, कई जोड़े यहाँ अपनी शादी को बचाने और सात जन्मों तक साथ रहने की कामना के साथ विशेष ‘गठबंधन’ अनुष्ठान करते हैं, जो एक लाल पवित्र कपड़े से किया जाता है।

श्रावणी मेला (Sawan Mela)

सावन के महीने में यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध श्रावणी मेला लगता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल भरकर लाते हैं और लगभग 100 किलोमीटर की पैदल काँवर यात्रा करके बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। इस यात्रा को ‘बोल-बम’ यात्रा भी कहा जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण मंदिर

मुख्य मंदिर परिसर के चारों ओर कुल 22 मंदिर हैं, जिनमें माता पार्वती, गणेश, काली, भैरव और अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी शामिल हैं।

आपकी देवघर यात्रा के लिए सुझाव

कैसे पहुँचें जानकारी
वायु मार्ग (By Air) निकटतम हवाई अड्डा: देवघर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (DGH) या रांची हवाई अड्डा।
रेल मार्ग (By Train) निकटतम प्रमुख स्टेशन: जसीडीह जंक्शन (Jasidih Junction), जो देवघर से लगभग 7 किमी दूर है।
सड़क मार्ग (By Road) देवघर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप आसानी से बस या टैक्सी बुक कर सकते हैं।