देवाधिदेव महादेव की पावन कृपा: जीवन को सार्थक बनाने के सात सूत्र
सीहोर के पावन सान्निध्य में आयोजित शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस का दिव्य अमृतपान आज हम सभी ने किया। पूज्य गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने कथा के इस चरण में भगवान महादेव के पारिवारिक स्वरूप, माता पार्वती की तपस्या, और शिव-पार्वती विवाह की दैवी लीला के मंगलमय वर्णन से भक्तों के हृदयों में शिवभक्ति का अमृत प्रवाहित किया।

✨ तृतीय दिवस के दिव्य प्रवचन का सार ✨
1. तपस्या से असंभव हुआ संभव: माता सती के त्याग के बाद, पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कैसा कठोर तप किया। गुरुदेव ने बताया कि यह कथा हमें सिखाती है कि भक्ति, तप, श्रद्धा और समर्पण से जीवन में असंभव भी संभव हो जाता है। यदि आपका संकल्प दृढ़ है और तपस्या सच्ची है, तो स्वयं महादेव आपकी पुकार सुनते हैं।
2. शिव-पार्वती विवाह का संदेश: शिव-पार्वती विवाह केवल एक दैवी लीला नहीं, बल्कि परम आध्यात्मिक संदेश है। यह दर्शाता है कि भगवान शिव की तटस्थ, सरल और करुणामयी प्रकृति किस प्रकार हर भक्त का कल्याण करती है। विवाह के बाद महादेव ने जिस तरह गृहस्थ जीवन को अपनाया, वह भक्तों को जीवन की सरलता और भक्ति के महत्व का बोध कराता है।
3. बाबा बैद्यनाथ की कामना-पूर्ण महिमा: पूज्य पंडित श्री ने देवघर में विराजित कामना-पूर्ण ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ जी की दिव्य महिमा का वर्णन किया। उन्होंने रावण की भक्ति और ज्योतिर्लिंग स्थापना की अद्वितीय कथा को अत्यंत प्रेरणादायी ढंग से प्रस्तुत किया। यह प्रसंग भक्तों को विश्वास दिलाता है कि बाबा बैद्यनाथ अपने हर भक्त की मनोकामना पूर्ण करने वाले हैं।

जीवन को सार्थक बनाने के सात अनमोल सूत्र
गुरुदेव ने कथा के माध्यम से जीवन की उलझनों को सुलझाने के लिए सात अनमोल सूत्र प्रदान किए, जिनका सार आपके लिए यहाँ पुनः प्रस्तुत है:
1. भक्ति सर्वोपरि: राजा के पुत्र का सबक केवल भौतिक चीज़ें (गाड़ी, घर) नहीं, बल्कि हमें स्वयं महादेव को माँगना चाहिए। राजा के पुत्र की कहानी सिखाती है: “भोलेनाथ, आप ही मेरे हो जाओ!” अगर महादेव हमारे हो गए, तो यह दुनिया अपने आप हमारी हो जाएगी।
2. समदृष्टि का भाव: रिद्धि-सिद्धि का रहस्य जीवन में समदृष्टि और समभाव रखें। गणेश जी की दो पत्नियों का उदाहरण याद रखें—बुद्धि को संतुलित रखना आवश्यक है। बेटी और बहू के प्रति समान प्रेम और आदर ही सच्चा गृहस्थ धर्म है।
3. संकल्प की शक्ति और महादेव पर भरोसा अपने संकल्प (जैसे व्रत, नियम) को पूरा करने की चिंता स्वयं महादेव करते हैं। हमें बस भक्ति में निरंतरता बनाए रखनी है। माली की तरह रोज़ पानी देते रहें, फल अवश्य लगेगा।
4. सती का हृदय: प्रेम और सम्मान की पराकाष्ठा देवघर का शक्तिपीठ दर्शाता है कि हमें अपने प्रियजनों के प्रति अटूट प्रेम और सम्मान रखना चाहिए। शिव के प्रति सती का प्रेम इतना था कि वे उनका अपमान सह नहीं पाईं।
5. शिव निंदा से बचें: दुर्ज ब्रह्म राक्षस की कहानी शिव निंदा करने या भक्तों को ताना मारने से बचें। दुर्ज ब्रह्म राक्षस की कथा बताती है कि शिव की भक्ति में बाधा डालने का परिणाम अंततः कष्टदायी होता है।
6. पंडाल की मिट्टी का बल गुरुदेव ने भक्तों के पत्रों के माध्यम से बताया कि कथा के पंडाल की मिट्टी (रज) चंदन और भस्म के समान कल्याणकारी है। लाखों भक्तों के जाप और कथा श्रवण से यह मिट्टी दैवीय शक्ति से भर जाती है, जो गंभीर रोगों और दुखों को दूर करती है।
7. जीवन जीने के चार सूत्र जीवन के चार कार्य हमेशा प्रसन्नता (स्माइल) के साथ करें:
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भोजन
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भजन
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व्यापार
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मिलन
जीवन जीने के चार सूत्र: प्रसन्नता (Smile) के साथ जिएँ हर पल!
पूज्य गुरुदेव पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने शिव महापुराण कथा के दौरान हमें चार ऐसे मूल कार्य बताए हैं, जिन्हें यदि हम केवल प्रसन्नता (स्माइल) के साथ करना शुरू कर दें, तो हमारा जीवन सुख, शांति और महादेव की कृपा से भर जाएगा।
ये सूत्र बताते हैं कि जीवन के हर छोटे-बड़े क्षण में समता और संतोष का भाव कैसे बनाए रखा जाए:
1. भोजन (The Act of Eating)
भोजन केवल शरीर की आवश्यकता नहीं है, यह एक यज्ञ है। भोजन करते समय हमारा मन, बुद्धि और भाव अत्यंत शुद्ध और शांत होने चाहिए।
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क्यों आवश्यक है प्रसन्नता?
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पवित्रता: गुरुदेव बताते हैं कि जब हम क्रोध, गुस्सा, चिड़चिड़ाहट या दुःख में भोजन करते हैं, तो उस नकारात्मक ऊर्जा का सीधा असर हमारे शरीर और मन पर पड़ता है।
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स्वास्थ्य: प्रसन्नता के साथ किया गया भोजन बेहतर पचता है और शरीर को अधिक पोषण देता है।
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संबंधों में मिठास: घर में सास-ससुर, पति-पत्नी या बच्चों के साथ भोजन करते समय अक्सर छोटी-छोटी बातों पर तनाव हो जाता है। यदि आप मुस्कुराकर भोजन करते हैं, तो आप छोटी-मोटी टीका-टिप्पणी को अनदेखा कर पाते हैं, जिससे खाने की थाली का स्वाद और रिश्तों की मिठास बनी रहती है।
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मूल मंत्र: भोजन करते समय अपने मन को इतना पवित्र रखें कि चेहरे पर हमेशा एक हल्की मुस्कुराहट बनी रहे।
2. भजन (The Act of Devotion)
भजन का अर्थ केवल गीत गाना नहीं है, बल्कि भगवान के लिए किए गए सभी कार्य—मंदिर जाना, जल चढ़ाना, कथा सुनना, या जाप करना—भी भजन हैं।
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क्यों आवश्यक है प्रसन्नता?
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सच्चा समर्पण: जब आप दुःखी मन से या जबरदस्ती भगवान के सामने बैठते हैं, तो वह भक्ति दिखावा बन जाती है।
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स्वीकृति: भक्ति वह है, जिसमें आप अपने जीवन की हर स्थिति (सुख-दुख, लाभ-हानि) को स्वीकार कर महादेव के सम्मुख बैठते हैं।
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आकर्षण: जब आप प्रसन्नता से शिव का स्मरण करते हैं—चाहे वह एक लोटा जल चढ़ाना हो या “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” का जाप करना—तो भगवान तुरंत आपकी ओर आकर्षित होते हैं और आपकी पुकार सुनते हैं।
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मूल मंत्र: कथा सुनते समय, या मंदिर में, ऐसे न बैठें जैसे किसी ने मार-पीटकर बिठा दिया हो। बल्कि उस पिता के घर आने की प्रसन्नता और उत्साह आपके चेहरे पर झलकना चाहिए।
3. व्यापार (The Act of Work/Business)
व्यापार या नौकरी में काम करना हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह धन कमाने का माध्यम है, जिसे कभी बोझ नहीं समझना चाहिए।
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क्यों आवश्यक है प्रसन्नता?
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सकारात्मक ऊर्जा: व्यापार या ऑफिस में यदि आप चिड़चिड़े रहते हैं, तो उस जगह की ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है।
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संबंध और ग्राहक: दुकान पर ग्राहकों को निभाते समय या ऑफिस में सहकर्मियों से बात करते समय चेहरे पर मुस्कान रखना, आपके व्यावसायिक और पेशेवर संबंधों को मजबूत बनाता है। ग्राहक उसी दुकान पर बार-बार जाना पसंद करते हैं, जहाँ उन्हें सम्मान और प्रसन्नता मिलती है।
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तनाव मुक्ति: काम के दौरान होने वाले तनाव को अपनी प्रसन्नता से हल्का करें।
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मूल मंत्र: अपनी दुकान या ऑफिस में काम करते समय ग्राहक, सहकर्मी, और सहयोगी के साथ हमेशा प्रसन्नता का भाव रखें।
4. मिलन (The Act of Meeting People)
मिलन का अर्थ है किसी भी व्यक्ति से मिलना, चाहे वह परिचित हो या अपरिचित।
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क्यों आवश्यक है प्रसन्नता?
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सर्वश्रेष्ठ भेंट: जब आप किसी से मिलते हैं और आपके पास देने के लिए कोई गुलदस्ता, माला, या मिठाई का डिब्बा नहीं है, तो आपकी मुस्कुराहट सबसे अमूल्य उपहार है।
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ऊर्जा का आदान-प्रदान: प्रसन्नता के साथ किया गया मिलन सामने वाले व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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प्रभाव: गुरुदेव बताते हैं कि जैसे एक सेल्फी में अच्छी रोशनी या महंगे कपड़े मायने नहीं रखते, बल्कि एक हल्की-सी ‘स्माइल’ तस्वीर को सुंदर बना देती है, वैसे ही जीवन में भी आपका सरल और प्रसन्नचित्त चेहरा ही सबसे अधिक प्रभावशाली होता है।
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मूल मंत्र: किसी से भी मिलते समय अपने चेहरे की सहज प्रसन्नता अवश्य भेंट करें।